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“Tere Ishk Mein Review: कहानी भटकी, पर Dhanush–Kriti की एक्टिंग ने कर दिया जादू! 😱🔥”

तरे इश्क़ में (Tere Ishk Mein X) — रिव्यू: परफॉर्मेंस दमदार, कहानी थोड़ी उलझन में 💔🎬

लेख: BindasNews • अपडेट:
आनंद एल. राय की नई फिल्म तरे इश्क़ में (Tere Ishk Mein X) दर्शकों और क्रिटिक्स के बीच विवाद का विषय बनी है। एक तरफ़ Dhanush और Kriti Sanon की एक्टिंग को बार-बार सराहा जा रहा है, तो दूसरी तरफ़ फिल्म की स्टोरीटेलिंग और पेसिंग को लेकर काफ़ी शिकायतें आ रही हैं। आइए, आसान और स्पष्ट भाषा में समझते हैं — क्या अच्छा है, क्या खराब है और किस तरह का दर्शक इसे पसंद कर सकता है। 🍿

किस चीज़ ने दिल जीता? — एक्टिंग और म्यूज़िक 🎭🎶

Dhanush और Kriti Sanon ने स्क्रीन पर जो केमिस्ट्री और इमोशन दिखाया है, वह कई बार फिल्म की कमज़ोरियों को ढंक देता है। Dhanush की भाव-भंगिमा बेहद सूक्ष्म और ज़मीन-से-जुड़ी लगती है, वहीं Kriti Sanon ने अपने किरदार में जो भरोसा और संवेदनशीलता डाली है, वह साफ़ नज़र आती है। लंबे-पलों पर दोनों की परफॉर्मेंस दर्शक को बांधे रखती है।

म्यूज़िक — अगर फिल्म का एक बड़ा सहारा है तो वह है गाने और बैकग्राउंड स्कोर। संगीत की कुछ कियाँ सीन-बाय-सीन असर करती हैं और भावनात्मक लहर को बढ़ाती हैं। 🎧

कहाँ फँस गई कहानी? — प्लॉट, पेसिंग और टोन ⏳

फिल्म की सबसे बड़ी कमी है उसकी अनियमित कहानी। कई सब-प्लॉट्स और फ्लैशबैक की भरमार से सीन कभी-कभी उलझन में बदल जाते हैं। क्लास डिफरेंस, निजी ट्रॉमा और कुछ अधिकारिक सबटेक्स्ट एक साथ बहुत कुछ कहने की कोशिश करते हैं — पर उन सबको जोड़ने का तरीका इतना साफ़ नहीं दिखता।

पेसिंग की बात करें तो फ़िल्म लंबी है और बीच-बीच में धीमा पड़ जाती है। पहले हिस्से में कहानी धीमी लग सकती है, जबकि दूसरे हिस्से में भावनात्मक क्रूज़ अधिक होता है। नतीजा: कुछ दर्शक प्रभावित होते हैं, तो कुछ कहते हैं कि फ़िल्म अपना ग्रिप खो देती है।

क्या फिल्म में ‘टॉक्सिक लव’ की झलक है? — संवेदनशील मुद्दे ⚠️

कुछ समीक्षकों और दर्शकों ने指出 किया है कि फिल्म में प्रेम के कुछ पलों को ओवर-ड्रामेटिक और कभी-कभी अस्वास्थ्यकर तरीके से दर्शाया गया है। अगर आप ऐसे रिश्तों पर संवेदनशील हैं जो हिंसा या नियंत्रित व्यवहार को रोमांटिकाइज़ करते हैं, तो यह पहलू आपको परेशान कर सकता है। फिल्म इसे संवैधानिक रूप से रोचक बनाना चाहती है, पर कई बार लाइन क्रॉस होती नज़र आती है।

डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले — अच्छा प्रयास पर निस्संदेह कमियां ✍️

आनंद एल. राय की फिल्में अक्सर भावनात्मक ऊँचाइयों और टेक्सचर के लिए जानी जाती हैं। इस बार भी डायरेक्शन में कई अच्छे पल हैं — कुछ सीन दिल को छू लेते हैं और बॉडी-लैंग्वेज का उपयोग प्रभावी है। पर स्क्रीनप्ले में जो कॉन्सिस्टेंसी चाहिए थी, वह कमी नजर आती है। कुछ मोड़ प्राकृतिक नहीं लगते और कुछ दिग्बंधित संवाद फिल्म की गति को रोक देते हैं।

किसे देखनी चाहिए और किसे छोड़ देनी चाहिए? — काफ़ी ज़रूरी सलाह ✔️❌

देखें अगर: आप दोनों स्टार्स के फैन हैं, गहरे-भाव वाले म्यूज़िक और इंटेंस ड्रामे को पसंद करते हैं, और फिल्म में परफॉर्मेंस को प्राथमिकता देते हैं।

नज़रअंदाज़ करें अगर: आप क्लीन, लैजिकल और हल्की-फुल्की रोमांटिक फ़िल्म देखना चाहते हैं; या फिर आप ऐसे रिश्ते दिखने पर संवेदनशील हैं जो नियंत्रित या टॉक्सिक टोन दे रहे हों।

खास सीन और छोटे-छोटे पल जो चुभते हैं ✨

फ़िल्म के कुछ विज़ुअल मोमेंट्स और एक-दो संवाद इतने असरदार हैं कि वे लंबे समय तक याद रहते हैं। छोटे-छोटे सीन — जैसे अचानक आई कोई आत्मीय बातचीत या साइलेंट शॉट — फिल्म को इंसानियत का स्पर्श देते हैं। ये पल बताता हैं कि फिल्म के पास अच्छा मटेरियल था, बस उसे सही रूप में बांधने की ज़रूरत थी।

निष्कर्ष — मिलीजुली राय, पर परफॉर्मेंस जरूर देखें 🎯

कुल मिलाकर Tere Ishk Mein X एक मिलीजुली फिल्म है — जहाँ परफॉर्मेंस और म्यूज़िक की तारीफ बख़ूबी होती है, वहीं कहानी और पेसिंग की खामियाँ साफ़ नज़र आती हैं। अगर आप भावनात्मक और अभिनय प्रधान फिल्में देखते हैं, तो यह आपके लिए वैल्यू दे सकती है; पर अगर आप तंग, सटीक और लॉजिक-सक्षम स्क्रीनप्ले चाहते हैं, तो यह फिल्म थोड़ा फीकी पड़ेगी।

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