UP के प्राइमरी स्कूलों में बड़ा बदलाव: अब ऑनलाइन लगेगी शिक्षकों की हाजिरी, खुद खरीदना होगा डिवाइस 📱
UP के प्राइमरी स्कूलों को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। सरकार ने कुछ स्कूलों में
शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति (Online Attendance) अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है।
इस फैसले के बाद अब शिक्षकों को हर दिन अपनी हाजिरी डिजिटल तरीके से दर्ज करनी होगी।
हालांकि इस आदेश के साथ एक नई बहस भी शुरू हो गई है, क्योंकि स्कूलों को इसके लिए
मोबाइल या टैबलेट जैसे डिवाइस खुद खरीदने होंगे। 📊
क्या है नया आदेश? 🏫
जानकारी के अनुसार समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित उत्तर प्रदेश के लगभग
413 प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति अब ऑनलाइन दर्ज की जाएगी।
इसका मतलब यह है कि अब पारंपरिक रजिस्टर की जगह डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल होगा।
सरकार का मानना है कि इससे स्कूलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और शिक्षकों की उपस्थिति पर
बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।
स्कूलों को खुद खरीदना होगा डिवाइस 📱
इस आदेश का सबसे ज्यादा चर्चा वाला हिस्सा यह है कि ऑनलाइन हाजिरी लगाने के लिए
स्कूलों को मोबाइल या टैबलेट जैसे डिवाइस खुद खरीदने होंगे।
हालांकि विभाग की तरफ से यह भी कहा गया है कि:
- सॉफ्टवेयर और सिस्टम सरकार उपलब्ध कराएगी
- लेकिन मोबाइल या टैबलेट खरीदने की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होगी
- इंटरनेट कनेक्शन की व्यवस्था भी स्कूलों को ही करनी होगी
यही वजह है कि कई स्कूल प्रबंधन और शिक्षक इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।
क्यों लाया गया यह सिस्टम? 🤔

सरकार का कहना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है।
कई बार शिकायतें आती थीं कि कुछ जगहों पर शिक्षक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते या
उनकी उपस्थिति सही तरीके से दर्ज नहीं होती।
डिजिटल सिस्टम लागू होने के बाद:
- शिक्षकों की उपस्थिति रियल टाइम में दर्ज होगी
- अधिकारी आसानी से निगरानी कर सकेंगे
- स्कूलों में अनुशासन बढ़ेगा
ग्रामीण स्कूलों में हो सकती है परेशानी 🌐
हालांकि इस फैसले को लेकर कुछ व्यावहारिक समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूलों में अभी भी इंटरनेट की सुविधा अच्छी नहीं है।
इसके अलावा कई स्कूलों के पास इतना बजट भी नहीं है कि वे तुरंत मोबाइल या
टैबलेट खरीद सकें।
कुछ शिक्षकों का कहना है कि अगर सरकार डिवाइस खरीदने के लिए भी फंड दे देती
तो यह व्यवस्था और बेहतर तरीके से लागू हो सकती थी।
नेटवर्क न होने पर क्या होगा? 📶
विभाग की तरफ से कहा गया है कि अगर किसी स्कूल में इंटरनेट की समस्या है
तो उपस्थिति पहले ऑफलाइन दर्ज की जा सकती है। बाद में नेटवर्क आने पर
डेटा सिस्टम में अपलोड कर दिया जाएगा।
इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि नेटवर्क समस्या की वजह से
शिक्षकों को परेशानी न हो।
शिक्षकों की क्या है राय? 👨🏫
इस फैसले पर शिक्षकों की राय मिली-जुली है।
कुछ शिक्षक मानते हैं कि डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी और
कामकाज में सुधार होगा।
वहीं कई शिक्षक और स्कूल प्रबंधन का कहना है कि:
- डिवाइस खरीदना अतिरिक्त खर्च है
- कई छोटे स्कूल पहले से ही आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं
- ग्रामीण इलाकों में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं
शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने की कोशिश 💻
दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से सरकारी स्कूलों में
डिजिटल सिस्टम लागू करने की कोशिश कर रही है।
ऑनलाइन उपस्थिति के साथ-साथ कई जगहों पर स्मार्ट क्लास,
डिजिटल पढ़ाई और ऑनलाइन मॉनिटरिंग जैसी योजनाएं भी शुरू की गई हैं।
सरकार का मानना है कि इससे सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार होगा
और छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी।
आगे क्या हो सकता है? 🔍
अब देखने वाली बात यह होगी कि यह सिस्टम कितनी तेजी से लागू होता है
और स्कूल इसे किस तरह अपनाते हैं।
अगर सरकार भविष्य में डिवाइस खरीदने के लिए भी मदद देती है
तो यह व्यवस्था और प्रभावी हो सकती है।
फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश के कई प्राइमरी स्कूलों में
अब शिक्षकों की हाजिरी पारंपरिक रजिस्टर की बजाय डिजिटल तरीके से
दर्ज होती दिखाई दे सकती है।