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🚨 लोकसभा में बवाल! महिला सांसदों ने PM मोदी की सीट घेरी — संसद में मचा हड़कंप

🗳️ लोकसभा हंगामा: जब महिला MPs ने प्रधानमंत्री की सीट को घेरा 🇮🇳

4 फरवरी 2026 को भारत की संसद लोकसभा में एक असाधारण घटना हुई जिसने टीवी, सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का दौर खोल दिया। विपक्षी सांसदों द्वारा विरोध प्रदर्शन इतना तीव्र हुआ कि प्रधानमंत्री का भाषण रद्द करना पड़ा तथा सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई। चलिए पूरी कहानी सरल, रोचक और तथ्य-आधारित तरीके से जानते हैं 👇

📅 आखिर क्या हुआ था?

बजट सत्र के दौरान लोकसभा में दिनभर के लिए लगातार विरोध और हंगामा चलता रहा। दिन के अंत में जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने वाला भाषण होना था, विपक्षी सांसदों का विरोध चरम पर पहुँच गया। महिला सांसदों सहित कई विपक्षी MPs की सक्रियता के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित हो गई।

👩‍⚖️ महिला सांसदों का विरोध और सीट घेरना

जैसे ही लोकसभा दोपहर में फिर शुरू हुई, कुछ विपक्षी महिला सांसदों ने सत्ताधारी पक्ष की सीटों को बंद किया और खासकर प्रधानमंत्री की कुर्सी के आसपास पहुंचकर जोरदार विरोध किया। उन्होंने बड़े बैनर के साथ नारे भी लगाए और अपने मुद्दों को सदन में जोरदार तरीके से उठाया।

🔥 विरोध तेज किस वजह से हुआ?

प्रधान वजह यह थी कि विपक्षी सांसदों ने कहा कि उन्हें संसद में बोलने का पूरा मौका नहीं दिया जा रहा और खासकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख **एम.एम. नरवणे** की किताब के कुछ अंश पढ़ने की अनुमति नहीं मिली। यह किताब भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़ी थी, और इस पर चर्चा करना विपक्ष चाहता था।

इसके अलावा पिछले दिनों कुछ विपक्षी MPs को **निलंबित** कर दिया गया था, जिससे विरोध और गहरा गया। ये निलंबन भी सदन में हंगामे का कारण बने।

🏛️ प्रधानमंत्री का भाषण क्यों टला?

लोकसभा के शेड्यूल के मुताबिक श्री मोदी शाम करीब 5 बजे वार्ता में शामिल होने वाले थे। लेकिन विधान सभा में हो रहे हंगामे ने स्थिति ऐसी बना दी कि भाषण शुरू होने से पहले ही सदन को स्थगित करना पड़ा।

बाद में यह निर्णय लिया गया कि लोकसभा की कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए पूरा रोक दिया जाए। इस कारण धन्यवाद प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई और सत्र कल फिर शुरु होगा।

🗣️ दोनों तरफ के बयान और राजनीति

📌 बीजेपी का पक्ष

बीजेपी सांसदों का कहना था कि विरोध प्रदर्शन पूर्व नियोजित था और कुछ विपक्षी महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री की सीट के करीब आकर “खतरा” पैदा किया। उन्हें यह कदम असामान्य और घातक भी बताया गया।

📌 विपक्ष का पक्ष

विपक्षी दलों ने कहा कि उन्हें संसद में बोलने ही नहीं दिया जा रहा है, इसलिए यह विरोध आवश्यक था। उन्होंने निलंबन और नियमों के लागू न होने को लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय बताया।

🔍 संसद में आज का पूरा माहौल

दिनभर लोकसभा में विरोध के कारण कार्यवाही कई बार रोकी गई और फिर से शुरू की गई। नारेबाजी, कागज़ फेंकने, और सांसदों के बीच तीखी बहसें भी हुईं। विपक्ष ने जोर देकर कहा कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब चाहते हैं, खासकर 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद के संदर्भ में।

📌 आज की घटना का सार

📣 निष्कर्ष

4 फरवरी 2026 की यह घटना दिखाती है कि संसद में सियासी संघर्ष कितनी तेजी से बढ़ सकता है और कैसे विरोध-प्रदर्शन संसद की प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे समय में लोकतंत्र के मूल्यों और नियमों का सम्मान भी महत्वपूर्ण होता है। 🇮🇳

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