
लखनऊ यूनिवर्सिटी में सुंदरकांड Vs नमाज 😮 कैंपस में आमने-सामने आए छात्र, जानिए पूरा मामला
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लखनऊ यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह पढ़ाई या रिजल्ट नहीं, बल्कि धार्मिक गतिविधियों को लेकर उठा विवाद है। कैंपस में सुंदरकांड पाठ और नमाज को लेकर दो छात्र समूह आमने-सामने आ गए। माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया और पुलिस तक को तैनात करना पड़ा। 😟
📌 आखिर विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
मामला यूनिवर्सिटी परिसर में मौजूद एक पुरानी इमारत लाल बारादरी से जुड़ा है। यह इमारत ऐतिहासिक मानी जाती है और लंबे समय से कुछ छात्र यहां नमाज अदा करते रहे हैं। हाल ही में प्रशासन ने इस इमारत को जर्जर बताते हुए सील कर दिया।
जब मुस्लिम छात्रों को नमाज पढ़ने से रोका गया तो उन्होंने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि यह उनकी धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है और वर्षों से यहां नमाज होती आई है। 🙏
🤝 हिंदू छात्रों ने बनाया ह्यूमन चेन
घटना ने नया मोड़ तब लिया जब कुछ हिंदू छात्र मुस्लिम छात्रों के समर्थन में खड़े हो गए। उन्होंने ह्यूमन चेन बनाकर कहा कि सभी को अपनी धार्मिक प्रार्थना करने का अधिकार है। यह दृश्य कई लोगों के लिए साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल बन गया। ❤️
🚩 फिर उठी सुंदरकांड की मांग
इसी दौरान एक अन्य छात्र समूह ने मांग उठाई कि यदि कैंपस में नमाज की अनुमति दी जा सकती है तो उन्हें भी सुंदरकांड पाठ करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उनका तर्क था कि समान अधिकार सबको मिलना चाहिए।
इसके बाद कैंपस में नारेबाजी भी हुई। कुछ छात्रों ने धार्मिक नारे लगाए, जिससे माहौल और गरमा गया। 😮
👮 पुलिस और प्रशासन की एंट्री
स्थिति को बिगड़ते देख यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पुलिस को बुलाया। कैंपस में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। प्रशासन ने साफ कहा कि इमारत जर्जर है और सुरक्षा कारणों से सील की गई है, इसका मकसद किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं है।
📢 प्रशासन का आधिकारिक बयान
प्रशासन का कहना है कि लाल बारादरी संरचनात्मक रूप से कमजोर हो चुकी है। इंजीनियरिंग रिपोर्ट के आधार पर इसे बंद किया गया है। उनका यह भी कहना है कि वहां आधिकारिक तौर पर मस्जिद दर्ज नहीं है।
यूनिवर्सिटी ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि कैंपस शिक्षा का केंद्र है, धार्मिक विवाद का नहीं। 📚
🧠 छात्रों की अलग-अलग राय
कुछ छात्रों का मानना है कि धार्मिक गतिविधियों को कैंपस से दूर रखना चाहिए ताकि पढ़ाई का माहौल प्रभावित न हो। वहीं कुछ का कहना है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और सभी को अपनी आस्था का पालन करने की स्वतंत्रता है।
यह बहस अब सोशल मीडिया तक पहुंच चुकी है। ट्विटर और फेसबुक पर #LucknowUniversity ट्रेंड करने लगा। 📱
⚖️ क्या कहता है कानून?
भारतीय संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता देता है। लेकिन सार्वजनिक संस्थानों में सुरक्षा और प्रशासनिक नियम भी लागू होते हैं। ऐसे में संतुलन बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है।
🌍 समाज के लिए क्या संदेश?
यह घटना हमें दो बातें सिखाती है — पहली, धार्मिक सहिष्णुता जरूरी है। दूसरी, किसी भी विवाद को संवाद से हल किया जा सकता है। कैंपस में जिस तरह कुछ छात्रों ने एक-दूसरे के समर्थन में खड़े होकर भाईचारे का संदेश दिया, वह काबिले-तारीफ है। 👏
📊 आगे क्या हो सकता है?
संभावना है कि प्रशासन छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करे और कोई मध्य मार्ग निकाले। फिलहाल कैंपस में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
🔎 निष्कर्ष
लखनऊ यूनिवर्सिटी में सुंदरकांड बनाम नमाज विवाद ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हालांकि मामला संवेदनशील है, लेकिन अभी तक कोई बड़ी हिंसक घटना सामने नहीं आई है। उम्मीद है कि बातचीत और समझदारी से समाधान निकलेगा। 🙏
