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यूपी RTE नियमों में बड़ा झटका 🚨: किराए पर रहने वाले बच्चों का एडमिशन बंद, कल से आवेदन शुरू

यूपी RTE नियमों में बड़ा बदलाव 🚨: किराए पर रहने वाले बच्चों को नहीं मिलेगा दाखिला

उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) को लेकर सरकार ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने हजारों अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है 😟।
अब किराए के मकान में रहने वाले बच्चों को RTE कोटे के तहत प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश नहीं मिलेगा
सरकार के इस फैसले को लेकर राज्य भर में बहस तेज हो गई है।

📌 क्या है RTE और क्यों है यह इतना जरूरी?

RTE यानी Right To Education Act, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित तबके के बच्चों को
प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटों पर मुफ्त शिक्षा दी जाती है 📚।

अब तक यह कानून उन लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण था, जो महंगे स्कूलों की फीस नहीं भर सकते थे।
लेकिन नए नियमों ने इस उम्मीद को बड़ा झटका दिया है।

🚫 क्या है नया नियम? समझिए आसान भाषा में

यूपी सरकार के नए आदेश के अनुसार:

सीधे शब्दों में कहें तो अब सिर्फ वही बच्चे RTE में आवेदन कर पाएंगे, जिनके माता-पिता के नाम पर मकान रजिस्टर्ड है।

📅 आवेदन कब से शुरू होंगे?

सरकार के मुताबिक:

यानी पहले आओ-पहले पाओ नहीं, बल्कि कंप्यूटर लॉटरी से तय होगा कि किस बच्चे को स्कूल मिलेगा।

🤔 सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

सरकार का तर्क है कि:

पिछले कुछ वर्षों में शिकायतें मिली थीं कि कई लोग सिर्फ एडमिशन के लिए फर्जी किरायानामा बनवा लेते थे।

😟 आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

इस फैसले का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा:

आज के समय में शहरों में लाखों परिवार किराए पर रहते हैं। ऐसे में उनके बच्चों के लिए अच्छे स्कूलों के दरवाजे बंद होना
एक गंभीर चिंता का विषय है 😔।

🧑‍🎓 बच्चों के भविष्य पर सवाल

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बच्चों के मौलिक अधिकार पर असर डाल सकता है।

एक सवाल लगातार उठ रहा है —
“अगर माता-पिता के पास खुद का घर नहीं है, तो क्या बच्चे पढ़ाई के हकदार नहीं?”

📑 आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

अगर आप पात्र हैं, तो ये दस्तावेज जरूरी होंगे:

सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होंगे, वरना आवेदन रद्द हो सकता है।

💰 यूनिफॉर्म और किताबों का पैसा कैसे मिलेगा?

सरकार ने यह भी साफ किया है कि:

इससे स्कूलों और अभिभावकों के बीच होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगेगी।

⚖️ क्या इस फैसले पर हो सकता है विरोध?

कई सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने इस नियम को भेदभावपूर्ण बताया है।

संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में:

🔚 निष्कर्ष

यूपी में RTE नियमों में हुआ यह बदलाव हजारों परिवारों के लिए बड़ा झटका है।
जहां सरकार पारदर्शिता की बात कर रही है, वहीं गरीब और किराए पर रहने वाले परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

अब देखना होगा कि यह फैसला बच्चों के भविष्य को कितना प्रभावित करता है और सरकार आगे क्या रुख अपनाती है 🤞।

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