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यूपी में बड़ा फैसला: नेपाल से बहू बनकर आई महिलाएं नहीं बन पाएंगी वोटर, जानिए पूरा कानून और असर 😲🗳️

यूपी में बड़ा फैसला: नेपाल से बहू बनकर आई महिलाएं नहीं बन पाएंगी वोटर 😲🗳️

उत्तर प्रदेश से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने हजारों परिवारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। नेपाल से शादी करके भारत आईं महिलाएं, जो सालों से यूपी के गांवों और शहरों में रह रही हैं, अब भी मतदाता यानी वोटर नहीं बन सकेंगी। 😔
यह फैसला सुनने में जितना सख्त लगता है, उतना ही जटिल इसका कानून भी है।

❓ आखिर पूरा मामला क्या है?

यूपी के सीमावर्ती जिलों जैसे महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच में बड़ी संख्या में नेपाली महिलाएं भारतीय युवकों से शादी करके आई हैं।
इन महिलाओं के बच्चे भारतीय स्कूलों में पढ़ते हैं, परिवार राशन कार्ड और आधार कार्ड तक बनवा चुका है, लेकिन वोट डालने का अधिकार अब भी नहीं मिलेगा। 🗳️❌

⚖️ वोटर बनने से क्यों रोका गया?

चुनाव आयोग और प्रशासन का साफ कहना है कि मतदान का अधिकार केवल भारतीय नागरिक को ही मिलता है
नेपाल से आई महिलाएं भले ही भारत में रह रही हों, लेकिन जब तक वे भारतीय नागरिकता नहीं लेतीं, तब तक उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किया जा सकता।

👉 सिर्फ निवासी होना या शादी कर लेना, नागरिकता नहीं बनाता।

📜 कानून क्या कहता है?

भारत में मतदान का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मिलता है।
इसके अनुसार:

नेपाल से आई महिलाएं कानूनी रूप से अब भी विदेशी नागरिक मानी जाती हैं, जब तक उन्हें भारतीय नागरिकता न मिल जाए।

🤔 नेपाल और भारत के रिश्ते इतने खुले हैं, फिर दिक्कत क्यों?

भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा है। नेपाली नागरिक बिना वीजा भारत आ-जा सकते हैं, काम कर सकते हैं और रह भी सकते हैं।
लेकिन ❗ खुली सीमा का मतलब नागरिकता नहीं होता

यही वजह है कि:

👩‍👧 बच्चों को मिलेगा अधिकार, मां को नहीं?

यह सबसे भावनात्मक सवाल है। 😢
कई मामलों में नेपाली महिला के बच्चे भारतीय नागरिक माने जाते हैं क्योंकि उनके पिता भारतीय हैं।

✔ बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं
✔ आगे चलकर वोटर भी बन सकते हैं
❌ लेकिन मां अब भी वोट नहीं डाल सकती

📝 क्या नेपाली बहू भारतीय नागरिक बन सकती है?

हाँ, बन सकती है। लेकिन इसके लिए एक लंबी कानूनी प्रक्रिया है।

📌 नागरिकता पाने की शर्तें

इन सभी प्रक्रियाओं के बाद ही नागरिकता मिलती है। तब जाकर वोटर बनने का रास्ता खुलता है। 🛣️

🏡 गांवों में क्यों बढ़ी चिंता?

सीमावर्ती इलाकों में हजारों ऐसी महिलाएं हैं जो:

लेकिन वोट न डाल पाने से वे खुद को दूसरे दर्जे का नागरिक महसूस कर रही हैं। 😔

🗳️ चुनाव आयोग ने सख्ती क्यों बढ़ाई?

हाल के वर्षों में चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की गहन जांच शुरू की है।
इस दौरान यह सामने आया कि कुछ जगहों पर विदेशी नागरिकों के नाम भी वोटर लिस्ट में दर्ज हो गए थे।

इसी को रोकने के लिए अब सख्ती की जा रही है ताकि:

😡 क्या यह फैसला गलत है?

इस पर राय बंटी हुई है।

🔹 कुछ लोग इसे जरूरी बताते हैं
🔹 कुछ इसे अमानवीय मानते हैं
🔹 कई महिलाएं खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हैं

लेकिन कानून की नजर में भावनाओं से ज्यादा नागरिकता की स्थिति अहम है।

📢 आगे क्या बदल सकता है?

फिलहाल नियमों में किसी बदलाव की घोषणा नहीं हुई है।
हालांकि सामाजिक संगठनों का कहना है कि सरकार को:

🔍 निष्कर्ष

नेपाल से बहू बनकर भारत आई महिलाएं भले ही दिल से खुद को भारतीय मानती हों ❤️,
लेकिन कानून उन्हें तब तक वोट का अधिकार नहीं देता जब तक वे भारतीय नागरिक नहीं बन जातीं।

यह फैसला भावनात्मक रूप से कठिन है, लेकिन कानूनी रूप से सरकार का पक्ष मजबूत माना जा रहा है।
आने वाले समय में इस मुद्दे पर बहस और तेज होने वाली है। 🔥

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