यूपी की राजनीति में ‘इमोशनल कार्ड’ या दिल का दर्द? जब भरी सभा में फूट-फूटकर रोने लगे मंत्री संजय निषाद! 😭💔
उत्तर प्रदेश की सियासत में कब क्या हो जाए, कोई नहीं जानता! लेकिन हाल ही में गोरखपुर की पावन धरती से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने सबको हैरान कर दिया। यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के सर्वेसर्वा डॉ. संजय निषाद एक जनसभा के दौरान मंच पर ही फूट-फूटकर रोने लगे।
आलम यह था कि मंत्री जी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे और वहां मौजूद समर्थक सन्न रह गए। आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक कद्दावर नेता को भरी महफिल में बच्चों की तरह रोना पड़ा? आइए जानते हैं इस ‘इमोशनल’ घटना के पीछे की पूरी कहानी। 👇
🔥 ‘हमें ठगा गया, हमें लूटा गया’ – पिछली सरकारों पर तीखा प्रहार
गोरखपुर में आयोजित इस जनसभा में संजय निषाद अपने समाज के लोगों को संबोधित कर रहे थे। माइक हाथ में लेते ही उनका गला भर आया। उन्होंने पिछली सरकारों (SP-BSP) पर निशाना साधते हुए कहा:
“इन लोगों ने निषाद समाज को सिर्फ वोट बैंक समझा। जब हक देने की बारी आई तो हमें ठगने और लूटने का काम किया। हमारे बच्चों का भविष्य बर्बाद किया गया और हमारे आरक्षण की फाइलें दबा दी गईं।”
संजय निषाद ने रोते हुए आरोप लगाया कि पहले की सरकारों ने निषाद समाज के मछुआरों पर अत्याचार किए, उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया और जब वे अपने हक की आवाज उठाते थे, तो उन पर लाठियां बरसाई जाती थीं। 🤜💥
📉 आरक्षण की वो टीस, जो आज भी बरकरार है
संजय निषाद की राजनीति का मुख्य आधार ‘निषाद आरक्षण’ है। वे लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि मझवार जाति के नाम पर निषाद समाज को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा मिले। मंच पर रोते हुए उन्होंने उसी पुराने संघर्ष को याद किया।
- कसरवल कांड की याद: उनके आंसुओं के पीछे कहीं न कहीं वो पुराने संघर्ष थे, जहाँ उनके समाज के लोगों ने अपनी जान तक गंवाई थी।
- अपनों का दर्द: उन्होंने कहा कि आज जब वो मंत्री हैं, तब भी उन्हें अपने समाज की पुरानी बदहाली याद आती है तो दिल भर आता है।
🧐 चुनावी स्टंट या असली संवेदना? क्या कहते हैं राजनीतिक पंडित
यूपी में उपचुनावों की आहट है और ऐसे में संजय निषाद का यह ‘इमोशनल अवतार’ काफी चर्चा बटोर रहा है। राजनीति के गलियारों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं:
| पक्ष | विचार |
|---|---|
| समर्थक | मंत्री जी अपने समाज के प्रति बेहद संवेदनशील हैं, उनके आंसू उनके संघर्ष की गवाही देते हैं। ❤️ |
| विपक्ष | यह सिर्फ जनता की सहानुभूति बटोरने का एक तरीका है ताकि चुनावी फायदा मिल सके। 🎭 |
| आम जनता | जनता चाहती है कि रोने के बजाय मंत्री जी आरक्षण के मुद्दे को सरकार से हल करवाएं। 🗳️ |
🚀 सोशल मीडिया पर ‘आंसुओं का सैलाब’ वायरल
जैसे ही संजय निषाद के रोने का वीडियो इंटरनेट पर आया, यह आग की तरह फैल गया। कुछ लोग इसे “मगरमच्छ के आंसू” बता रहे हैं, तो कुछ लोग लिख रहे हैं कि “नेता भी इंसान होता है, उसे भी दर्द होता है।”
खासकर निषाद समाज के युवाओं के बीच यह वीडियो काफी शेयर किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि संजय निषाद ने जिस तरह से पिछली सरकारों की ‘लूट’ का जिक्र किया, वह कहीं न कहीं कड़वा सच है। 📱💥
✅ निष्कर्ष: क्या आंसुओं से बदलेगी निषाद समाज की किस्मत?
संजय निषाद का रोना महज एक पल की भावुकता है या फिर आने वाले चुनाव के लिए एक सोची-समझी रणनीति, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन एक बात साफ है कि उन्होंने यूपी की राजनीति में एक बार फिर पिछड़ा कार्ड और आरक्षण के मुद्दे को गर्मा दिया है।
अगर बीजेपी और निषाद पार्टी का यह गठबंधन समाज को आरक्षण दिलाने में कामयाब होता है, तो शायद ये आंसू ‘खुशी के आंसुओं’ में बदल जाएं। वरना, जनता अब सिर्फ भावनाओं पर नहीं, बल्कि परिणामों पर वोट देती है। 🙏✨
आपका क्या कहना है? क्या संजय निषाद का रोना जायज था? हमें कमेंट में जरूर बताएं!
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