
😨 कन्नौज: पत्नी ने साथ चलने से किया इनकार तो पति ने काट डाली नाक! दांत से किया हमला
उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। एक महिला ने अपने शराबी और हिंसक पति के साथ जाने से इनकार कर दिया तो उस वहशी पति ने उसकी नाक को दांत से काटकर अलग कर दिया। 😢
ये घटना न केवल एक घरेलू हिंसा का मामला है, बल्कि एक स्त्री की आत्मनिर्भरता और साहस पर हमला भी है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
📍 कहां की है ये खौफनाक घटना?
घटना उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के ठठिया थाना क्षेत्र के कालीनपुरवा गांव की है। यहां रहने वाली गुड्डी देवी (35 वर्ष) नाम की महिला ने अपने पति की प्रताड़नाओं से तंग आकर सालों पहले उसे छोड़ दिया था और मायके लौट आई थी।
पति पप्पू शराबी था, आए दिन उसे पीटता था। लेकिन महिला हार नहीं मानी और अपने बलबूते पर ज़िंदगी जीने लगी। वो मजदूरी करके खुद का और बच्चों का पेट पाल रही थी।
🤯 क्या हुआ उस दिन?
5 अगस्त 2025 को गुड्डी अपने काम से वापस लौट रही थी। तभी रास्ते में उसका पति पप्पू मिल गया। उसने गुड्डी से कहा, “चलो मेरे साथ घर वापस।” लेकिन गुड्डी ने साफ मना कर दिया।
बस फिर क्या था! पप्पू का पारा चढ़ गया। वो गुड्डी को खींचकर झाड़ियों में ले गया और वहां दांतों से उसकी नाक पर हमला कर दिया। खून से लथपथ गुड्डी दर्द से चीख रही थी लेकिन आसपास कोई मदद को नहीं था। 😨
पप्पू ने न सिर्फ नाक काटी, बल्कि उसे अपने साथ लेकर भाग गया। ये बात पुलिस और डॉक्टर दोनों को हैरान कर गई कि कोई इंसान इतनी क्रूरता भी कर सकता है।
🏥 महिला की हालत गंभीर, कानपुर रेफर
गुड्डी किसी तरह उठकर जिला अस्पताल पहुंची। डॉक्टरों ने बताया कि नाक पूरी तरह अलग हो चुकी है और खून बहाव बहुत अधिक था। तुरंत इलाज के बाद उन्हें कानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां उनकी प्लास्टिक सर्जरी की कोशिशें चल रही हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि समय पर अस्पताल पहुंचने की वजह से उनकी जान बच गई, लेकिन चेहरा पूरी तरह से बिगड़ गया है।
🚨 पहले भी कर चुका है हमला
यह पहला मामला नहीं है। करीब तीन साल पहले भी पप्पू ने गुड्डी पर चाकू से कई बार हमला किया था। उस केस में उसे जेल हुई थी लेकिन कुछ समय बाद जमानत पर बाहर आ गया।
गुड्डी ने तब भी शिकायत की थी कि पप्पू जान से मारने की धमकी देता है। लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
👮♀️ पुलिस क्या कर रही है?
गुड्डी की शिकायत पर पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज कर ली है और पप्पू की तलाश शुरू कर दी गई है।
ठठिया थाने के प्रभारी का कहना है कि आरोपी पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है और जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।
⚖️ कौन-कौन सी धाराएं लग सकती हैं?
- धारा 326 – खतरनाक हथियार से गंभीर चोट
- धारा 323 – जानबूझकर चोट पहुँचाना
- धारा 504 – सार्वजनिक रूप से अपमानित करना
- धारा 506 – जान से मारने की धमकी देना
अगर पुलिस सही समय पर कार्रवाई करती, तो शायद ये घटना रोकी जा सकती थी। 😔
🔎 क्या कहती हैं महिला की मां?
गुड्डी की मां ने बताया कि, “मेरी बेटी ने बहुत सहा है। उस दरिंदे ने पहले भी उसे जान से मारने की कोशिश की थी। अब ये सब कर डाला। सरकार को ऐसे इंसान को तुरंत फांसी देनी चाहिए।”
💬 लोग क्या कह रहे हैं?
घटना के बाद पूरे गांव में दहशत है। लोग कह रहे हैं कि:
- “हमने कभी नहीं सुना कि कोई पति अपनी पत्नी की नाक काट ले।” 😨
- “सरकार को ऐसे लोगों पर सख्त कानून बनाना चाहिए।”
- “महिला को न्याय मिलना ही चाहिए।”
🧠 मनोवैज्ञानिक क्या कहते हैं?
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के व्यवहार गंभीर मानसिक विकृति का संकेत हैं।
ऐसे लोग जिन्हें सत्ता, ईगो या अस्वीकृति बर्दाश्त नहीं होती, वे हिंसा पर उतर आते हैं। और जब शराब या गुस्से का असर हो, तो परिणाम और भी भयावह हो जाते हैं।
👩⚖️ महिला सुरक्षा की विफलता?
ये मामला महिला सुरक्षा को लेकर सरकार और समाज दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। आखिर कब तक महिलाएं अपने ही पतियों से सुरक्षित नहीं होंगी?
महिला आयोग, पुलिस और पंचायत जैसे संस्थान अगर समय रहते कार्रवाई करें तो शायद ये दर्दनाक घटनाएं रोकी जा सकती हैं।
📢 हम क्या कर सकते हैं?
- घरेलू हिंसा की घटनाएं नजरअंदाज न करें।
- अगर कोई पीड़िता मदद मांगे, तो उसे चुप रहने की सलाह देने की बजाय उसका साथ दें।
- स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखें, शिकायत करें।
- महिलाओं को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।
📝 निष्कर्ष
गुड्डी देवी की नाक काटना सिर्फ एक महिला पर हमला नहीं है, बल्कि पूरे समाज की चुप्पी पर करारा तमाचा है।
इस मामले को जल्द से जल्द न्याय मिलना चाहिए और पप्पू जैसे दरिंदों को कानून के सबसे सख्त दंड मिलने चाहिए। ताकि भविष्य में कोई भी पति अपनी पत्नी पर ऐसा बर्बर अत्याचार करने की हिम्मत न करे। 😡
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🧨 रिश्तों की हदें कब पार होती हैं?
एक पति द्वारा पत्नी की नाक काट देना कोई सामान्य झगड़ा नहीं, बल्कि एक मानसिक विकृति और अस्वीकार्यता की पराकाष्ठा है। अक्सर हम रिश्तों में समझौते की बातें करते हैं, लेकिन जब कोई इंसान अपने अहंकार, ईगो और गुस्से में इतना अंधा हो जाए कि इंसानियत भी भूल जाए – तब सवाल उठता है कि समाज ने कहां चूक की?
गुड्डी देवी ने पप्पू के साथ सालों गुजारे, लेकिन जब तक उन्होंने अपनी जिंदगी को नया मोड़ देने की कोशिश की, तब तक वह हिंसा की शिकार हो चुकी थीं। ये सिर्फ एक महिला की त्रासदी नहीं है – ये हमारे समाज की उन अनकही परंपराओं की हार है, जो महिलाओं को ‘सहनशील’ बनने की सलाह देती है। 😔
👨👩👧👦 बच्चों पर असर: एक अनदेखा सच
इस तरह की घटनाओं में सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं बच्चे। गुड्डी और पप्पू के भी बच्चे हैं, जो अब इस भयावह सच्चाई के साथ जी रहे हैं कि उनके पिता ने उनकी मां के साथ ऐसी हैवानियत की।
बच्चों के मन में डर, गुस्सा और असुरक्षा गहराई से बैठ जाती है। कई बार वे खुद भी आक्रामक या अवसादग्रस्त हो जाते हैं। यह समाज के लिए चेतावनी है कि घरेलू हिंसा केवल एक पीड़ित पर नहीं रुकती – इसकी लहरें पूरे परिवार को तोड़ देती हैं। 💔
⚠️ सिस्टम की सुस्ती, अपराधियों की हिम्मत
पप्पू पहले भी हमला कर चुका था। उसे जेल हुई, लेकिन जमानत मिल गई। फिर क्या हुआ? किसी ने निगरानी नहीं रखी, किसी ने गुड्डी को सुरक्षा नहीं दी।
यह वही व्यवस्था है जो शपथ लेती है ‘नारी सुरक्षा’ की। लेकिन जब समय आता है, तो या तो कागज़ी कार्रवाई होती है या दिखावे के बयान।
आज अगर सिस्टम मजबूत होता – तो शायद पप्पू कभी बाहर ही न आता। और अगर आया भी, तो पुलिस की नज़र में रहता। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। यही लापरवाही अपराधियों को और बेखौफ बना देती है। 😡
📣 कानून के साथ संवेदना भी जरूरी
हमारे पास कानून तो हैं – IPC की धाराएं, महिला आयोग, पुलिस थाने, हेल्पलाइन नंबर – लेकिन क्या ये पीड़ित तक सही समय पर पहुंचते हैं? और अगर पहुंचते हैं, तो क्या वो संवेदना भी साथ लाते हैं?
गुड्डी जैसी महिलाएं सिर्फ कानून नहीं, इंसानियत और भरोसे की उम्मीद करती हैं। उन्हें एक ऐसा सिस्टम चाहिए जो डर न दिलाए, बल्कि सुरक्षा</strong का एहसास कराए।
🧑⚖️ क्या फास्ट ट्रैक कोर्ट से मिलेगा न्याय?
ऐसे जघन्य मामलों में लंबे समय तक अदालतों में मुकदमे चलते रहते हैं। लेकिन अब सवाल ये है कि क्या इस केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट</strong में ले जाकर जल्दी न्याय दिया जाएगा?
वरना समाज का भरोसा फिर डगमगाएगा और पप्पू जैसे लोग ये समझेंगे कि वो जो चाहे कर सकते हैं – बिना किसी डर के।
🧕 ग्रामीण महिलाओं की हकीकत
शहरों की तुलना में गांवों की महिलाएं ऐसे मामलों में और भी ज्यादा असहाय होती हैं। न उन्हें कानून की जानकारी होती है, न ही परिवार से सपोर्ट।
गुड्डी देवी ने हिम्मत दिखाई, लेकिन बहुत सी महिलाएं घरेलू हिंसा सहते-सहते घुट जाती हैं। उन्हें डर होता है समाज का, पंचायत का, और सबसे ज्यादा – अपने ही परिवार का।
अगर गांव स्तर पर महिला स्वयं सहायता समूह, कानूनी शिविर और मानसिक स्वास्थ्य की सुविधाएं पहुंचें, तो शायद कई गुड्डियों की जिंदगी बदल सकती है। 🙏
📺 मीडिया की भूमिका और ज़िम्मेदारी
आज इस घटना की खबर वायरल हो गई है, लेकिन क्या मीडिया सिर्फ सनसनी फैलाने तक सीमित रहेगा? क्या वो न्याय दिलाने की लड़ाई में भी साथ देगा?
जरूरी है कि हम सब मिलकर ऐसे मामलों में लंबी लड़ाई लड़ें – सोशल मीडिया हो या प्रिंट मीडिया, खबरें सिर्फ ब्रेकिंग नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाधान के साथ होनी चाहिए।
🧭 आगे क्या?
अब देखना ये है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या पप्पू को जल्द पकड़ा जाएगा? क्या गुड्डी को मुआवज़ा और चिकित्सा सहायता मिलेगी? क्या बच्चों को मानसिक सहयोग मिलेगा?
इन सवालों का जवाब ही हमारे सिस्टम की असली तस्वीर बताएगा। और ये भी तय करेगा कि भविष्य में कोई और महिला इसी पीड़ा से बचेगी या नहीं।