
📘 जनरल एम.एम. नरवणे की किताब का रहस्य: जो छपी ही नहीं, वो संसद तक कैसे पहुंच गई?
भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की आत्मकथा इन दिनों देश की राजनीति और मीडिया में तूफान बनी हुई है 🌪️। किताब का नाम बताया जा रहा है “Four Stars of Destiny” — लेकिन हैरानी की बात यह है कि पब्लिशर खुद कह रहा है कि यह किताब अभी तक छपी ही नहीं है।
अब सवाल ये उठता है 🤔 — अगर किताब छपी नहीं, तो फिर उसकी कॉपी सोशल मीडिया पर कैसे घूम रही है? संसद में उसका हवाला कैसे दिया गया? और पुलिस को FIR क्यों करनी पड़ी?
📖 पब्लिशर का साफ बयान – किताब प्रकाशित ही नहीं हुई
Penguin Random House India, जो इस किताब का आधिकारिक प्रकाशक है, उसने साफ-साफ कहा है कि:
- ❌ किताब की कोई हार्डकॉपी नहीं छपी
- ❌ कोई डिजिटल वर्जन जारी नहीं हुआ
- ❌ कोई बिक्री या वितरण नहीं हुआ
यानि आधिकारिक तौर पर यह किताब अभी मौजूद ही नहीं है।
पब्लिशर ने यह भी चेतावनी दी है ⚠️ कि अगर कोई PDF या प्रिंटेड कॉपी घूम रही है तो वह गैरकानूनी है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
📱 फिर कॉपी आई कहां से? यही बना सबसे बड़ा सवाल
यहीं से कहानी ने रहस्य का रूप ले लिया 🕵️♂️
कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर इस किताब की एक पूरी PDF वायरल हो गई। लोग उसे शेयर करने लगे, पढ़ने लगे और उस पर बहस शुरू हो गई।
इतना ही नहीं — संसद में भी इस किताब के कुछ हिस्सों का हवाला दिया गया, जिससे राजनीतिक भूचाल आ गया 🌋।
अब जब पब्लिशर कह रहा है कि किताब छपी ही नहीं, तो लोग पूछ रहे हैं:
- 👉 ये PDF किसने बनाई?
- 👉 ये कंटेंट बाहर कैसे आया?
- 👉 क्या ये ड्राफ्ट था या लीक?
🚓 दिल्ली पुलिस की एंट्री – FIR दर्ज
मामला बढ़ते ही दिल्ली पुलिस हरकत में आई 🚔
पुलिस ने इस बात की जांच शुरू कर दी कि एक अप्रकाशित किताब की कॉपी सार्वजनिक कैसे हुई।
अब यह पता लगाया जा रहा है:
- 📌 क्या यह किसी अंदरूनी व्यक्ति ने लीक की?
- 📌 क्या किसी ने जानबूझकर राजनीतिक मकसद से फैलाया?
- 📌 या यह किसी अधूरी पांडुलिपि से बनी?
यह जांच इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यक्ति की किताब का है 🇮🇳
🏛️ संसद में क्यों भड़का विवाद?
जब राहुल गांधी ने संसद में इस किताब के कुछ अंशों का जिक्र किया, तो सत्ता पक्ष ने जोरदार विरोध किया 📢
सरकार का कहना था:
“जब किताब आधिकारिक रूप से प्रकाशित ही नहीं हुई, तो उसका हवाला देना नियमों के खिलाफ है।”
यहीं से यह मामला सिर्फ किताब तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक लड़ाई में बदल गया ⚔️
🧠 किताब को मंजूरी क्यों जरूरी होती है?
सेना प्रमुख या वरिष्ठ अधिकारियों की किताबें सीधे प्रकाशित नहीं हो जातीं 📚
उन पर पहले रक्षा मंत्रालय की जांच होती है, ताकि:
- 🛡️ कोई गोपनीय जानकारी बाहर न जाए
- 🛡️ देश की सुरक्षा को खतरा न हो
- 🛡️ सैन्य रणनीति उजागर न हो
कहा जा रहा है कि नरवणे की किताब भी इसी मंजूरी प्रक्रिया में अटकी हुई थी।
❗ फिर लीक होना कितना गंभीर मामला है?
अगर बिना मंजूरी किताब लीक हुई है, तो यह सिर्फ कॉपीराइट का नहीं बल्कि सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा भी हो सकता है 🚨
इसी वजह से पुलिस और एजेंसियां इसे हल्के में नहीं ले रहीं।
📌 जनरल नरवणे ने क्या कहा?
जनरल नरवणे ने खुद पब्लिशर के बयान को साझा करते हुए कहा कि किताब आधिकारिक रूप से अभी प्रकाशित नहीं हुई है।
यानि वे भी फिलहाल पब्लिशर की बात का समर्थन करते दिखे
📍 अब आगे क्या?
आने वाले दिनों में जांच से कई बड़े खुलासे हो सकते हैं 🔍
संभव है:
- ✔️ लीक करने वाला सामने आए
- ✔️ पूरा नेटवर्क पकड़ा जाए
- ✔️ सच सबके सामने आए
🧾 निष्कर्ष
जनरल नरवणे की किताब का मामला अब सिर्फ एक किताब का नहीं रहा 📕
यह बन चुका है:
- ⚡ रहस्य
- ⚡ राजनीतिक हथियार
- ⚡ कानूनी जांच
एक तरफ पब्लिशर कह रहा है किताब छपी ही नहीं, दूसरी तरफ पूरी किताब इंटरनेट पर घूम रही है।
अब देखना यह है कि सच क्या निकलकर सामने आता है — लीक, साजिश या कोई बड़ी सच्चाई? ⏳
